Madhya Pradesh AND Mudumalai Tiger Reserve

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  Madhya Pradesh AND Mudumalai Tiger Reserve

                          TIGER IMAGE

मधुमलाई टाइगर रिज़र्व
 हाल ही में एलिफेंट विसपेरस फ़िल्म ने पचानवे वें अकादमी पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र लघु श्रेणी का ऑस्कर जीता इस फ़िल्म को मदुमलाई टाइगर रिज़र्व के दांत थेप्पाक्कडु हाथी शिविर में फ़िल्माया गया था, जो एशिया का सबसे पुराना हाथी शिविर है चलिए आप जानते हैं मधुमलाई टाइगर रिज़र्व के बारे में ये तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में स्थित एक संरक्षित क्षेत्र है ये तीन सौ इक्कीस वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है जो तीन राज्यों यानी कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के ट्राइजंक्शन पर स्थित है ये नीलगिरी पहाड़ियों के उत्तर पूर्वी और उत्तर पश्चिमी ढलानों पर स्थित है जो पश्चिमी घाट का भाग है इसके अलावा यह भारत के पहले बार फिर रिज़र्व नीलगिरी बायोस्फिर रिज़र्व का भी हिस्सा है इसकी सीमा पश्चिम में वायनाड वन्यजीव अभयारण्य यानी केरल में उत्तर में बांदीपुर टाइगर रिज़र्व कर्नाटक दक्षिण पूर्व में

नीलगिरी नॉर्थ डिविजन दक्षिण पश्चिम में गुडलूर फॉरेस्ट डिविजन से लगती है चलिए नजर डालते हैं इसके वनस्पति और जीव पर यहाँ उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन नम पनपती वन, नम सागौन वन, शुष्क सागौन, द्वितीय घास के मैदान और दलदल से लेकर विभिन्न प्रकार के आवास पाए जाते हैं इस क्षेत्र में लंबी घास पाई जाती है, जिसे आम तौर पर हाथी घास के रूप में जाना जाता है और ये सागौन रोज़वुड की लकड़ियों जितनी मूल्यवान होती है, यहाँ खेती वाले पौधों की तरह के जंगली पौधे पाए जाते हैं, जैसे जंगली चावल, अदरक, हल्दी, दालचीनी आदि यहाँ पाए जाने वाले जीवों में बाघ, हाथी, भारतीय गौर पैंथर, सांभर, चित्तीदार हिरण, बार्किंग डिअर, माउस, डियर साधारण लंगूर, माला बार, विशाल का गिलहरी, लकड़बग्घा आदि शामिल हैं इस रिज़र्व में पक्षियों की दो सौ साठ से अधिक प्रजातियां के विस्तृत श्रृंखला पाई जाती है इसके अलावा भारत में पाई जाने वाली आठ प्रतिशत पक्षी प्रजातियां मधु मुलायम में दर्ज की गई है चलिए अब इस टॉपिक से रिलेटेड या स्पेशल देख लेते हैं मदुमलाई टाइगर रिज़र्व के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये कथन एक ये तीन राज्यों यानी कर्नाटक, केरल औरतमिलनाडु के ट्राइजंक्शन पर स्थित है और ये नीलगिरी बायोस्फिर रिज़र्व का हिस्सा है

 New Tiger Reserve in Madhya Pradesh

 मध्य प्रदेश में नए टाइगर रिज़र्व को मंजूरी हाल ही में मध्य प्रदेश वन्यजीव बोर्ड ने प्रदेश में नए बाघ अभयारण्य को मंजूरी दी है इस नए टाइगर रिज़र्व का नाम दुर्गावती टाइगर रिज़र्व होगा इसके तहत नए टाइगर रिज़र्व में एक हज़ार चार सौ चौदह वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कोर एरिया और नौ सौ पच्चीस वर्ग किलोमीटर को बफर के रूप में अधिसूचित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है अब प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए को भेजा जाएगा आप बात कर रहे हैं दुर्गावती टाइगर रिज़र्व के बारे में तो ये राज्य के नरसिंहपुर, दमोह और सागर जिलों में फैला होगा इस नए टाइगर रिज़र्व में पन्ना टाइगर रिज़र्व यानी पीटीआर से बाघों को स्वाभाविक रूप से स्थानांतरित किया जाएगा पीटीआर को दुर्गावती से जोड़ने वाला एक ग्रीन कॉरिडोर विकसित किया जाएगा ताकि बाघों की प्राकृतिक आवाजाही नए रिज़र्व में हो सके आपको बता दें कि पीटीआर का एक चौथाई भाग केन बेतवा नदियों को जोड़ने के कारण जलमग्न हो जाएगा इसलिए इस नए रिज़र्व को बनाया जा रहा है और तलब है कि केन बेतवा नदी जोड़ों परियोजना के मद्दे नजर पन्ना के लिए वन्य जीव प्रबंधन योजना के हिस्से के रूप में एनटीसीए ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकारों को नए बाघ अभयारण्यों को अधिसूचित करने के लिए कहा था केंद्र के साथ दोनों राज्य सरकारे बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संकट को समाप्त करने के लिये चवालीस हज़ार, छः, सौ, पांच करोड़ रुपए की नदी जोड़ों परियोजना को लागू कर रही है इसी के चलते हाल ही में उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने चित्रकूट जिले में रानीपुर वन्य जीव अभ्यारण्य यानी आरडब्ल्यूएस में राज्य के चौथे बाघ अभयारण्य की अधिसूचना को मंजूरी दी थी मध्य प्रदेश में अन्य टाइगर रिज़र्व है कान्हा पेज बांधवगढ़ पन्ना सतपुरा और संजय दुबरी हालांकि राज्य में रातापानी टाइगर रिज़र्व बनाए जाने का प्रस्ताव भी लंबित है आप बात करे पन्ना टाइगर रिज़र्व के बारे में तो ये विंध्य पर्वतमाला में स्थित राज्य के उत्तर में पन्ना और छत्तरपुर जिलों में फैला हुआ महत्वपूर्ण भाग निवास स्थान है पन्ना राष्ट्रीय उद्यान उन्नीस सौ इक्यासी में बनाया गया था और इसे चौरानवे में टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया पन्ना बाघों और गिद्धों के लिए जाना जाता है वर्तमान में यहाँ करीब चौवन भाग है पन्ना

टाइगर इन्ट्रोडक्शन प्रोग्राम दो हज़ार नौ में शुरु किया गया था दो हज़ार बीस में यूनेस्को ने इसे अपने बॉयज फेयर क्षेत्र के वैश्विक नेटवर्क में शामिल किया था

UPSC RELEATED POST...

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