कानून [LAW]
"राज्य कानून का शिशु और जनक दोनों ही है।” —मैकाइवर
कानून का अर्थ(MEANING OF LAW)
राज्य
का लक्ष्य मानव कल्याण की उचित व्यवस्था करना है, किन्तु
इस लक्ष्य की प्राप्ति की आशा तभी की जा सकती है जबकि राज्य के नागरिक अपने जीवन
में आचरण के कुछ सामान्य नियमों का पालन करते हों। अतः राज्य अपने नागरिकों के
जीवन के संचालन हेतु नियमों का निर्माण करता है, जिनका
पालन करना व्यक्ति के लिए आवश्यक होता है और जिनका पालन न किये जाने पर व्यक्ति
दण्ड का भागी होता है। राजनीति विज्ञान में राज्य द्वारा निर्मित और लागू किए जाने
वाले इन नियमों को ही कानून कहते हैं ।
कानून आंग्ल भाषा के ‘लॉ'
(Law) शब्द का हिन्दी रूपान्तर है। 'लॉ'
शब्द
की उत्पत्ति ट्यूटॉनिक 'लैग' (Lag) से हुई है, जिसका अर्थ होता है ऐसी वस्तु जो सदा स्थिर, स्थायी और निश्चित या सभी परिस्थितियों में समान रूप
में रहे।
अतः शब्द व्युत्पत्ति की दृष्टि से 'कानून' का अर्थ है 'वह जो एकरूप बना रहे।' 'ऑक्सफोर्ड शब्दकोश' में इसकी परिभाषा 'सत्ता द्वारा आरोपित आचार व्यवहार के नियम' के रूप में की गयी है।
कुछ
प्रमुख विद्वानों द्वारा कानून की परिभाषा इस प्रकार की गयी है :
वुडरो विल्सन के अनुसार, 'कानून स्थिति, विचार तथा स्वभाव का वह अंश है, जिसे
शासक की शक्ति लागू करती है।
आस्टिन के अनुसार, 'कानून सम्प्रभु की आज्ञा है
।""
पाउण्ड के शब्दों में, “न्याय के प्रशासन में जनता
और नियमित न्यायालयों द्वारा मान्यता प्राप्त या लागू किये गये नियमों को कानून
कहते हैं । "
प्रो. सालमण्ड के अनुसार, “कानून नियमों का वह समूह है
जिसे राज्य मान्यता देता है और न्याय व्यवस्था के प्रशासन में लागू करता है।" "
ग्रीन के अनुसार, “अधिकारों और कर्तव्यों की उस
पद्धति को कानून कहा जा सकता है, जिसे सरकार
लागू
करती है।"
उपर्युक्त
परिभाषाओं की अपेक्षा हालैण्ड की परिभाषा अधिक स्पष्ट है, जिसके अनुसार, "आचरण के उन सामान्य नियमों को कानून कहते हैं, जो मनुष्य के बाहरी आचरण से सम्बन्धित होते हैं और
जिन्हें एक निश्चित सत्ता लागू करती है। यह निश्चित सत्ता राजनीतिक क्षेत्र
की मानवीय सत्ताओं में सर्वोच्च होती है।"
उपर्युक्त
परिभाषाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि कानून वे नियम हैं जिन्हें राज्य के
द्वारा निर्मित या स्वीकृत किया जाता है और जिनका पालन न करने पर राज्य के द्वारा
दण्डित किया जाता है।
कानून
के तत्व
उपर्युक्त
परिभाषाओं की विवेचना के आधार पर कानून के प्रमुख रूप से निम्नलिखित पांच तत्व
बतलाए जा सकते
हैं :
(1) कानून के लिए नागरिक समाज का
अस्तित्व आवश्यक है क्योंकि नागरिक समाज ही एक सुव्यवस्थित संगठन है और इस संगठन
के संचालन हेतु ही नियमों की आवश्यकता होती है।
(2) कानूनों के निर्माण(LAW MAKING) तथा उनकी क्रियान्विति के
लिए एक सम्प्रभुत्वपूर्ण सत्ता का अस्तित्व आवश्यक है।
(3) कानूनों का सम्बन्ध व्यक्ति के बाहरी आचरण से
होता है, उनकी आन्तरिक भावनाओं से नहीं ।
(4) नागरिकों को कानून(CIVIL LAW) का अनिवार्य रूप से पालन
करना होता है और कानून का उल्लंघन करने पर वे राज्य दण्ड के भागी होते हैं।
(5) कानून ऐसे होने चाहिए, जिनका पालन न केवल दण्ड के भय से वरन् सामाजिक हित की भावना
से किया जाए।
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