Limits of power
सत्ता की सीमाएं
An orderly society cannot be imagined without power, but a civilized and cultured society sets certain
limits of power,
which are absolutely necessary to be followed. Limitations of power mean restrictions on the use and
operation of power so that power cannot be used arbitrarily. Power has to
function in accordance with constitutional laws and political conditions and
cannot violate culture, values, traditions and moral concepts. These limits of power can be
natural, moral, objective, internal , external or even procedural A brief description of the
limits of power is as follows:
1. प्राकृतिक सीमा (Natural limits) -संविधान में मूल अधिकारों का उल्लेख हो अथवा न हो; किसी भी राज व्यवस्था को यह अधिकार नहीं हो सकता कि वह
नागरिकों को उनके जीवन, सामान्य स्वतन्त्रताओं और
सीमित सम्पत्ति से भी वंचित कर दे। यह सत्ता की प्रथम प्राकृतिक और अनिवार्य सीमा
है और इस सीमा का उल्लंघन करने वाली सत्ता का पतन निश्चित है।
2. नैतिक-धार्मिक विश्वास (Moral-religious beliefs) — नैतिकता और धार्मिक विश्वास भी सत्ता की अनिवार्य सीमा है। जब
कोई सत्ता नैतिकता और धार्मिक विश्वासों के प्रतिकूल आदेश देती है, तब उसका पालन करवाना बहुत अधिक कठिन हो जाता है।
3. संस्कृति(culture) - संस्कृति लोगों के उस जीवन ढंग का नाम है जो अपने आपको कला, साहित्य, धर्म, फैशन, संगीत और आचार-विचार के रूप में प्रकट करती है। सत्ता को संस्कृति या
समाज के सांस्कृतिक जीवन में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं हो सकता और न ही
संस्कृति के क्षेत्र में उसके द्वारा कुछ किया जा सकता है। 4. संविधान, नियम और उपनियम—संविधान राजसत्ता का अन्तिम स्रोत होता है, अतः सर्वोच्च सत्ता के लिए भी संविधान के प्रावधानों का पालन
आवश्यक होता है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक व्यवस्था कुशल
कार्य-संचालन के लिए नियम-उपनियम बना लेती है। ये नियम-उपनियम भी सत्ता की सीमाएं निर्धारित कर देते हैं।
5. आर्थिक सीमाएं(Economic limitations) - प्रत्येक राज-व्यवस्था
के आर्थिक साधन और आर्थिक क्षमताएं सीमित होती हैं। अतः
ये आर्थिक साधन और क्षमताएं सत्ता को सीमित करने की प्रवृत्ति रखते हैं।
6. अधीनस्थों की क्षमताएं और अधीनस्थों
द्वारा निर्मित संघ (Capabilities of subordinates and associations formed by subordinates) —कोई भी सत्ता अपने निर्णयों को करने लागू और आदेश मनवाने का
कार्य अधीनस्थों के माध्यम से करती है। अतः अधीनस्थों की क्षमता की सीमाएं सत्ता
की सीमा निर्धारित कर देती हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न व्यवस्थाओं में प्रायः
उनमें कार्य करने वाले कर्मचारी अपने निजी हितों की वृद्धि के लिए संघ, आदि बनाकर सामूहिक सौदेबाजी करते हैं, यह स्थिति भी सत्ता पर अवरोध लगा देती है।
7. अन्तर्राष्ट्रीय संगठन और
अन्तर्राष्ट्रीय कानून (International Organizations and International Law) - वर्तमान समय में संयुक्त राष्ट्र संघ और अन्य अन्तर्राष्ट्रीय
संगठनों के अस्तित्व और अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों की आंशिक मान्यता ने भी सत्ता पर
सीमाएं लगा दी हैं । यद्यपि अन्तर्राष्ट्रीय संगठन और अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों को
बाध्यकारी शक्ति प्राप्त नहीं है, लेकिन साथ ही यह सत्य है कि
राजसत्ता द्वारा मनमाने तौर पर इनकी अवहेलना नहीं की जा सकती ।
इन सबके अतिरिक्त भी सत्ता की कुछ सीमाएं हैं। प्रत्येक राज-व्यवस्था के कुछ निर्धारित और उद्घोषित लक्ष्य होते
हैं तथा सत्ता इन लक्ष्यों एवं आदर्शों का उल्लंघन नहीं कर सकती। सत्ता की कुछ
तकनीकी सीमाएं और कुछ मनोवैज्ञानिक सीमाएं भी होती हैं।
राजनीतिक चिन्तन की सार्थकता सत्ता को सामर्थ्य प्रदान करने तथा साथ-ही-साथ
उस पर सीमाएँ लगाने में ही है, जिससे सत्ता की जनहितकारिणी
स्थिति बनी रहे।
READ THE👉👉👉Basis of power सत्ता के आधार
READ THE👉👉👉न्याय [JUSTICE]
READ THE👉👉👉DIFFERENT IDEOLOGIES...
(YOU CAN VISIT THIS WEBSITE FOR UPSC,BPSC,JPSC,STATE PCS,POLITICAL SCIENCE HONOURS,HISTORY HONOURS IMPORTANT NEWS, FAMOUS MAN,UPSC RELEATED POST AND OTHER EXAM )

Do leave your comments